जो लड़की दर्द की वजह से सुई भी नही लगवाती वही लड़की एक दिन किसी बच्चे को जन्म देती है जिसका दर्द सुई के दर्द से कही अधिक होता है . ~सौरभ उपाध्याय "कुनाल" . .
ज़िंदगी की एक नई शुरुआत की थी जब मैंने पहली बार तुमसे बात की थी मृगनयन सी आँखों मे तेरे झील सा पानी था तृषा मुझमे भी थी ,ओ दौर जवानी था क्षुधा न थी देह की बस रूह का अनुराग था संगीत का ज्ञान नही, पर तेरी हर बात मे जैसे कोई राग था ~सौरभ उपाध्याय "कुनाल" .
कोई खुद को मजबूर कहता है तो कोई खुद का ही कसूर कहता है जरा संभाल कर रखना तुम भी अपने कदम उसकी गली में सुना है,हर बेवफा उसे अपना हुजूर कहता है ~सौरभ उपाध्याय "कुनाल"