ज़िंदगी की एक नई शुरुआत की थी
जब मैंने पहली बार तुमसे बात की थी
मृगनयन सी आँखों मे तेरे झील सा पानी था
तृषा मुझमे भी थी ,ओ दौर जवानी था
क्षुधा न थी देह की बस रूह का अनुराग था
संगीत का ज्ञान नही, पर तेरी हर बात मे जैसे कोई राग था
~सौरभ उपाध्याय "कुनाल"
.
Comments
Post a Comment