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Showing posts from June, 2021
खूबसूरत है और इसपर इतराती भी बहुत है  लोगों से तो बेझिझक बोलती है  पर मुझसे शरमाती बहुत है  और छिप जाती है अक्सर मुस्कुरा कर मुझे देख पता चला है वो मुझे चाहती बहुत है 

रातों से दोस्ती

 नींद से रिश्ता टूट रहा है  और रातों से दोस्ती हो रही है  और दिन से तो कोई मतलब ही नही रहा  और रहे भी तो कैसे तू है ही नही मेरा हाल पूछने वाला  मुझे डांटने वाला, मुझे मनाने वाला ये रात ही है जिसकी खामोशी में  तेरा नाम लेकर अपनी धड़कने गिन सकता हूँ  तुझे अपने पास महसूस कर सकता हूँ  मेरी जिंदगी भी अब रात के सन्नाटे सी हो गयी है  जहाँ जरा सी आवाज बहुत दूर तक सुनाई देती है  पर डरता हूँ कहीं तुम्हारा नाम ना निकल जाए  तू बेवजह बदनाम ना हो जाए  तुम गलत नही थे बस तुम्हें गलत इंसान मिल गया  तुम दिन की तलाश में थे और तुम्हें रात मिल गया  वैसे दिन तो मैं कभी बनना भी नहीं चाहता  क्योंकि दिन तो खूबसूरत होता है  और खूबसूरत चीज अक्सर फरेबी होती है  पर तुम कभी रात से भी दिल लगा के देखो  इसके सन्नाटे में एक अलग सा सुकून है ~सौरभ उपाध्याय "कुनाल"
 एक साल पहले की बात है । मैं नया नया अपनी कॉलोनी में आया था , दिन भर सामान और कपड़ा व्यवस्थित करते करते  शाम हो गई थी और मै थोड़ा थक भी गया था तो मैंने सोचा "लाओ चाय और कुर्सी लेकर खिड़की के पास बैठते है और इसी बहाने एक बार ऊपर से अपनी कॉलोनी भी देख लेंगे" पर (मुझे क्या पाता था कि कॉलोनी देखते देखते वो भी दिख जाएंगी) मैं बैठ कर चाय की चुस्कियां ले रहा था और कॉलोनी को देख रहा था तभी अचानक मेरी नजर उस पर पड़ी! वो दरवाजे पर खड़ी थी उसके मासूम चेहरे पर हल्की लेकिन प्यारी सी मुस्कान थी मेरी नजर उसे देखते ही रुक गई!  मानो मेरी आंखों ने दिल से समझौता कर लिया हो, मन तो किया की तुरंत जाकर उससे बात करूं लेकिन किसी के बारे में कुछ जाने बगैर उसके बारे में दिल में ज्यादा ख्याल लेना ठीक नहीं था हां ये पहली नजर का प्यार तो नहीं था लेकिन मै उससे बहुत आकर्षित हो गया था । दिन बीत रहे थे और मैं हर रोज अपनी बालकनी में बैठ कर उसे देखता , उसकी मुस्कुराहट को अपने अंदर महसूस करता । फिर एक दिन कॉलोनी में एक कार्यक्रम में मुझे उससे बात करने का मौका मिला । वो मेरे बगल ही बैठी थी और मैं उससे बात भी ...

वो

 वो मेरा नाम तक नही जानती और  मैं मोहल्ले भर मे उसके नाम से बदनाम हूँ ~सौरभ उपाध्याय "कुनाल"

इश्क़

इश्क़ की जो तुम बात करते हो इश्क़ पर क्यों नही तुम कोई किताब लिखते हो प्यार, मोहब्बत, धोखा सब तो आता है तुम्हें फिर क्यूँ तुम अपना ये हुनर बर्बाद करते हो ~सौरभ उपाध्याय "कुनाल"

जब लड़के बड़े होते है और जब लड़कियाँ बड़ी होती है

 जब लड़के बड़े होते है  तो हक मिलता है उन्हें घर में मत देने का  बड़ों को सुझाव देने का  छोटों को सलाह देने का  जब लड़के बड़े होते है  तो भेजा जाता है उन्हें घर से बाहर  दुनिया देखने के लिए  डिग्री लेने के लिए  और  जब लड़कियां बड़ी होती हैं तो रखा जाता है उन्हें घर में  दुनिया / समाज से दूर  सिखाया जाता है उन्हें  घर की लाज कैसे बचाए की जाती है उनके हाथ  पीले करने की तैयारी जब लड़कियां बड़ी होती हैं तो सिखाया जाता है उन्हें  की औरत होना उसकी कमजोरी है  जब लड़कियां बड़ी होती है  तो बदलता है नज़रिया समाज का उनके प्रति पर असल में जब लड़कियां बड़ी होती हैं  तो बदलता है समाज का स्वरूप  मिलती है समाज को एक मां , एक बहन, होता है सृष्टि का पुनर्निर्माण . . . ~ सौरभ उपाध्याय "कुनाल"