जब लड़के बड़े होते है और जब लड़कियाँ बड़ी होती है

 जब लड़के बड़े होते है 


तो हक मिलता है उन्हें घर में मत देने का 


बड़ों को सुझाव देने का 


छोटों को सलाह देने का 


जब लड़के बड़े होते है 


तो भेजा जाता है उन्हें घर से बाहर 


दुनिया देखने के लिए 


डिग्री लेने के लिए 


और 


जब लड़कियां बड़ी होती हैं


तो रखा जाता है उन्हें घर में 


दुनिया / समाज से दूर 


सिखाया जाता है उन्हें 


घर की लाज कैसे बचाए


की जाती है उनके हाथ 


पीले करने की तैयारी


जब लड़कियां बड़ी होती हैं


तो सिखाया जाता है उन्हें 


की औरत होना उसकी कमजोरी है 


जब लड़कियां बड़ी होती है 


तो बदलता है नज़रिया समाज का उनके प्रति


पर असल में जब लड़कियां बड़ी होती हैं 


तो बदलता है समाज का स्वरूप 


मिलती है समाज को एक मां , एक बहन,


होता है सृष्टि का पुनर्निर्माण

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~ सौरभ उपाध्याय "कुनाल"


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